अवैध निर्माण मामले में ग्रेसिम के खिलाफ नगरपालिका ने की न्यायालय में जाने की तैयारी

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अवैध निर्माण मामले में ग्रेसिम के खिलाफ नगरपालिका ने की न्यायालय में जाने की तैयारी

हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी नईदिल्ली

– *कैलाश सनोलिया*

उज्जैन/नागदा, 27 जुलाई (हि.स.)। जिले के नागदा नगर में संचालित बिड़ला घराने की मशहूर कंपनी ग्रेसिम के परिसर में करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन एक प्रोजेक्ट विवादों के घेरे में आ गया है। यह मामला शासकीय अफसरों के गले की हड्डी भी बन गया। ग्रेसिम प्रबंधन सीएमओं के आदेश के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रोक रहा है। सोमवार को मामले में एक नया मोड़ आया। नगरपालिका अब अभिभाषक के नोटिस के बाद उद्योग प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दायर करने जा रही है। यह पूरा बखेड़ा अभा असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया की एक उच्च स्तरीय शिकायत के बाद खड़ा हुआ है।

सीएमओ ने की पुष्टि

मुख्य नपा अधिकारी अशफाक खान ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि ग्रेसिम प्रबंधन ने अपने परिसर में एक अवैध निर्माण कार्य को सूचना के बाद भी नहीं रोका है। ऐसी स्थिति में अब विधिवक्ता के जरिये नोटिस जारी कर न्यायालय में प्रकरण दायर किया जा रहा है।

क्या है मामला

ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन अपने परिसर में जेएलडी संयंत्र अर्थात जीरो लिक्विड डिस्चार्ज का निर्माण कार्य कर रहा है। इसके निर्माण के पीछे एक बड़ी कहानी है। एनजीटी भोपाल में एक शिकायत प्रकरण में पाया गया कि ग्रेसिम प्रबंधन भारी मात्रा में हजारों लीटर दूषित पानी चंबल नदी में छोड़ रहा है। एनजीटी ने इस पर नियंत्रण करने का आदेश दिया। ऐसे में मप्र प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी में एक सयंत्र का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की थीम है कि जैसा इसका नाम है, उद्योग से दूषित पानी के प्रवाह को चबंल में जाने से शून्य करना है। मजेदार बात यह है कि इस प्रोजेक्ट का आगामी जनवरी तक पूरा करने की भी बंदिश है। यदि समय पर पूरा नहीं किया गया तो उद्योग प्रबंधन को करोड़ों का जुर्माना भरना होगा, लेकिन शिकायत के तहत इस प्रोजेक्ट में यह पेंच फंस गया कि प्रबंधन ने इसके निर्माण की विधिवत अनुमति नहीं ली और कार्य शुरू कर दिया। नगरपालिका सीमा में यह कार्य होने से सीएमओ ने अपनी टीम से जब जांच कराई तो मामला सामने आया कि प्रबंधन ने 100 मीटर लंबा एवं 60 मीटर चोड़ा निर्माण कार्य किया है, जो कि अवैधानिक है। इसलिए मप्र नपा अधिनियम नपा विधान 1961 की धारा 187.8 के तहत निर्माण कार्य रोकने का आदेश दे दिया।

हाथ लगे पुराने दस्तावेज

कंपनी एवं नपा के बीच उठे इस विवाद से जुड़े कई दस्तावेज हिन्दुस्थान समाचार के हाथ लगे हैं, जो लगभग 25 वर्ष पुराने हैं। इनसे यह प्रमाणित हो रहा है कि निर्माण कार्य विधि के अनुरूप नहीं है। ग्रेसिम प्रबंधन एवं नपा के बीच अनुबंध हुआ था कि ग्रेसिम अपने क्षेत्र में जो निर्माण कार्य करेगी उसके बदले में एक निर्धारित राशि नपा को देगी। जानकारों का कहना है कि इस अनुबंध में यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि उद्योग बिना अनुमति कोई भी निर्माण कार्य करेगा। निर्माण कार्य के बदले राशि जरूर एकमुश्त वर्ष में ली जाएगी।

ग्रेसिम प्रबंधन ने हाल में इस प्रकरण में जो जवाब पेश किया उसकी प्रति भी इस संवाददाता के हाथ लगी है। जिसमें ग्रेसिम ने अपने बचाव में यह दलील दी हैकि उद्योग को निर्माण कार्य के लिए नपा ने विशेष दर्जा दिया है।

अफसरों की बड़ी पोल सामने आई

विवाद उठने से एक बड़ा खुलासा हुआ है कि नपा के जिम्मेदार ने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया। जिससे जनता की तिजैारी में करोड़ों के राजस्व की हानि हुई। निर्माण कार्य के बदले एक अनुबंध के तहत एक निर्धारित राशि नपा जो उद्योग प्रबंधन से वसूलती है, यह अनुबंध वर्ष 2017 में ही समाप्त हो गया। बेपरवाह नपा अफसरों ने अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया। इसलिए तीन वर्ष की करोडों की राशि नपा में जमा नहीं हो पाई।

इस बात को नवागत सीएमओ अशफाक खान ने पकड़ लिया और एसडीओ राजस्व को पत्र भेजकर बताया कि ग्रेसिम एवं नपा के बीच के अनुबंध को समाप्त हो जाने से ग्रेसिम परिसर में चल रहे निर्माण कार्य का पंचनामा बनाया है। सीएमओ ने इस प्रकार का जो पत्र क्रंमांक 3022 एसडीओ को भेजा है उसकी प्रति भी हिन्दुस्थान समाचार के पास सुरक्षित है।

प्रकरण में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी एसएन द्विवेदी ने बताया निर्माण कार्य का विधान नपा से संबधित है तो नपा एवं उद्योग प्रबंधन जाने। हमने तो प्रोजेक्ट की अनुमति दी है, जबकि जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास ने रविवार को कुछ समाचार पत्रों में बयान दिया थाकि प्रदूषण विभाग से हमें निर्माण की अनुमति मिली है।

हिन्दुस्थान समाचार/ कैलाश सनोलिया
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