ज्योतिष सम्राट के देवलोकगमन से त्रिस्तुतिक जैन समाज की अपूरणीय क्षति: काश्यप

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ज्योतिष सम्राट के देवलोकगमन से त्रिस्तुतिक जैन समाज की अपूरणीय क्षति: काश्यप

रतलाम, 3 जून। परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य देवेश, ज्योतिष सम्राट श्रीमद्‌ विजय ॠषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के देवलोकगमन को विधायक एवं अ.भा. त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ के राष्ट्रीय परामर्शदाता चेतन्य काश्यप ने त्रिस्तुतक जैन समाज की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि वे आत्मकल्याण के साथ परमार्थ का मार्ग प्रशस्त करते रहे। उनका देवलोकगमन सम्पूर्ण समाज के लिए गहरी क्षति है।

श्री काश्यप ने कहा कि ज्योतिष सम्राट ने परम पूज्य आचार्य श्रीमद्‌विजय विद्याचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. के सानिन्नध्य में संयम जीवन का पालन करते हुए धार्मिक एवं आध्यात्मिक सेवा की। वे अहिंसा के प्रेरक होकर परम गौभक्त रहे, जीवदया उनमें कुट-कुट कर भरी थी। मैरा सौभाग्य रहा कि बाल्यकाल में सांसारिक जीवन से लेकर धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में उनके साथ कार्य करने का लंबा अनुभव मुझे मिला । राष्ट्रीय मुद्दों पर उन्होंने सदैव बैबाक विचार रखे, जिससे राष्ट्रीय स्तर के कई नेतागण से उनके संबंध रहे। धार्मिक विधियों के साथ-साथ वे ज्योतिषविधि के गहन जानकार थे। 100 से अधिक किताबें लिखकर उन्होंने साहित्य की भी सेवा की। आचार्य देवेश आधुनिक युग के विचार एवं पारंपरिकता दोनों के संवाहक थे।

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