सिद्धी तप ही मुक्ति का सबसे बड़ा साधन है : चन्द्रयंश विजय जी म.सा.

Spread the love

सिद्धी तप ही मुक्ति का सबसे बड़ा साधन है : चन्द्रयंश विजय जी म.सा.

नागदा(निप्र) – नागदा नगर में स्थानीय पौषधशाला मे चातुर्मास के दौरान विराजित सुप्रसिद्ध जैनसंत द्वारा चन्द्रभान उदयभान चरित्र एवं उत्तरायण सुत्र का वाचन करते हुए बुधवार को सैकड़ो श्रद्धालुओं के बीच धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य हेमेन्द्रसुरिश्वर जी म.सा. के शिष्यरत्न एवं आचार्य ऋषभचन्द्रसुरिश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती मुनि चंद्रयशविजयजी म.सा एवं जिनभद्रविजयजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि रेगिस्तान मे जल, पतझड़ मे फल, बीमारी में बल वैसे आत्मा का मनुष्य जन्म दुर्लभ है। चौरासी लाख जीव योनी मे भटकने के बाद मिले मनुष्य जीवन को आसानी से गवाना नही। दुर्लभता से प्राप्त वस्तु का बद्धिमता से उपयोग करना चाहिये। हमारा जन्म कल्पवृक्ष से भी मूल्य वान है। कल्पवृक्ष दस प्रकार के है, खाना, कपड़ा, बर्तन, मकान, संगीत, वाद्ययंत्र। आदिनाथ भगवान की नीतियों के प्रशिक्षण के आधार पर कल्पवृक्ष समाप्त हो गये। सुख-सुविधा और आमोद-प्रमोद के लिये हमें यह भाव नही मिला। मनुष्य भाव नियम संयम व्रत के लिये। अमेरिका की समृद्ध प्रगति देखने हम अमेरिका जाना चाहते है। लेकिन अमेरिका के लोग संस्कृति अध्यात्म धर्म को देखने भारत आना चाहते है। देवता धर्म व्रत करने के लिये मनुष्य बनना चाहते है और मनुष्य देवलोक मे सुख लेने जाना चाहता है। हमारा मनुष्य जीवन भोग के लिये नहीं तप के लिये बना है। मनुष्य जीवन मे ज्ञान, चारित्र, दर्शन, आराधना, उपासना जो हमे सुलभता से मिलती है वही लेना है। तपस्या नहीं करके आमोद-प्रमोद करना कल्पवृक्ष को उखाड़कर धतूरे के वृक्ष को बोने समान है। दूसरा मनुष्य जन्म चिन्तामणी रत्न के समान है, जिससे सारे प्रकार के आभूषणो और रत्नो की इच्छा होती है वह पूरी होती है। लेकिन आमोद-प्रमोद करके लोग जीवन व्यर्थ में गंवाते हुए रत्न के स्थान पर काँच ले लेते है। एरावत हाथी के समान जिसकी सवारी स्वयं इन्द्र महराजा करते है। आमोद प्रमोद मे जीवन व्यर्थ करना जैसे एरावत हाथी की जगह गधे लाना समान है।
साथ ही नागदा नगर में सर्वप्रथम बढ़ते क्रम में एक से लगाकर आठ तक उपवास करने वाले सिद्धीतप के आराधको के साथ गुरूवार 29 जुलाई को दोप. 3 बजे सामुहिक कलश भरने के साथ सिद्धीतप का प्रारम्भ होगा जिसके साथ ही सामुहिक धारणा का आयोजन किया जा रहा है। सिद्धीतप को लेकर समाज में भारी उत्साह का माहौल है। श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति ने ज्यादा से ज्यादा इस तप में जुड़कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग पर लेजाने का अनुरोध किया है।
कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील श्रीसंघ अध्यक्ष हेमन्त कांकरिया, संघ सचिव मनीष व्होरा, संघ कोषाध्यक्ष हर्षित नागदा, चातुर्मास समिति अध्यक्ष रितेश नागदा, समिति सचिव राजेश गेलडा, समिति कोषाध्यक्ष निलेश चौधरी, सुनिल कोठारी, अभय चोपडा, सुरेन्द्र कांकरिया, सोनव वागरेचा, ब्रजेश बोहरा, पारसमल गांग, सुशील हिंगड, ऋषभ नागदा, आशीष चौधरी, यश गेलडा, भावेश बुरड, राकेश ओरा(नुतन), अमृतलालजी ओसतवाल, मुकेश बोहरा, मनोज वागरेचा, सुनिल वागरेचा, सुभाष गेलडा, बाबुलाल ओरा, अमित गुगलिया, निलेश कोठारी, कमलेश नागदा, राकेश ओरा(प्रेमभाव), संतोष नाहटा, राजकुमार भारतीय, प्रकाश कोठारी, निर्मल छोरिया, मयंक कोचर, निखिल मेहता, जितेन्द्र तरवेचा, सुरेन्द्र संचेती, प्रकाश हिंगड सहित श्रीसंघ सदस्यो ने की है।

दिनांक – 28/07/2021

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed